गुरुवार, 05 नवंबर 2026 10:52 PM IST
DARSH NEWS
🌤️ 18°C
मनोरंजन अखिल भारतीय 5,982 व्यूज

Pyre: जीते जी बना ली अपनी 'चिता', दिल चीरती है 'बुजुर्ग कपल' की कहानी; 12 अवॉर्ड जीतकर दुनियाभर में बजाया डंका

DARSH NEWS डेस्क • 04 Nov 2026, 07:56 PM IST
Pyre: जीते जी बना ली अपनी 'चिता', दिल चीरती है 'बुजुर्ग कपल' की कहानी; 12 अवॉर्ड जीतकर दुनियाभर में बजाया डंका

Pyre एक ऐसी फिल्म है जिसका शोर बॉक्स ऑफिस पर न सही, लेकिन दुनियाभर के फिल्म फेस्टिवल में सुनाई दे रहा है। इस फिल्म की कहानी भावुक कर देगी। पायर फिल्म को मिले 12 अवॉर्ड्स।

फोटो क्रेडिट- यूट्यूब एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। खूबसूरत पहाड़, नीला आसमान, साफ नदी और हवा। उत्तराखंड की वादियां शहरी क्षेत्रों में रहने वालों को बहुत ही सुकून भरे लगते हैं, लेकिन असलीयत उससे अलग होती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में रहने की क्या चुनौतियां होती हैं, इसकी कहानी करीब से दिखाती है 'पायर' (Pyre) फिल्म। कोई ए-लिस्ट स्टार नहीं, बड़ा बजट नहीं, बड़ा डायरेक्टर नहीं। Pyre चर्चा में है तो बस इसकी एक दिल छू लेने वाली कहानी की वजह से।

115 मिनट की इस फिल्म ने दुनियाभर में धमाल मचा दिया है। कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसकी स्क्रीनिंग हुई और साथ ही 12 इंटरेशनल अवॉर्ड भी अपने नाम किए हैं। आखिरकार इस फिल्म में ऐसा क्या है और यह क्यों दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है और तारीफें बटोर रही है, चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं।

'पायर' का हिंदी में अर्थ है 'चिता'। यह कहानी उत्तराखंड के एक दूर-दराज कुमाऊनी गांव में रहने वाले एक बुजुर्ग कपल पदम सिंह और तुलसी की है। दोनों एक ऐसे गांव में रहते हैं, जहां न अस्पताल है, न बिजली है और ना ही सड़क है।

वो गांव खाली हो रहा है। 80 साल के पदम और उनकी पत्नी तुलसी के अलावा गांव में सिर्फ 7 और लोग रहते हैं। जब तुलसी बीमार हो जाती है, तो पदम अपने गांव में रहने वाले दो नौजवान को उसे अस्पताल ले जाने की गुहार लगाता है और बदले में अपनी बकरियां दे देता है।

डॉक्टर कहता है कि उन्हें तुलसी को फिर से दिखाने लाना होगा, लेकिन यहां मुश्किल यह है कि गांव में बचे वो दो नौजवान गांव छोड़ने का प्लान बना चुके हैं। अब तुलसी को अस्पताल कौन ले जाएगा, क्योंकि वह अकेले उसे उठाकर खतरनाक पहाड़ और नदियों को पार करके अस्पताल नहीं ले जा सकता।

धीरे-धीरे एक और परिवार ने वो गांव छोड़ दिया। अब सिर्फ वहां एक और कपल बचा है। अब फिक्र है कि अगर वे भी वहां से चले गए तो उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा।

पदम और तुलसी को चिट्ठी मिलती है कि उसका 28 साल पहले शहर चला गया बेटा वापस लौट रहा है। वह जश्न में डूब जाते हैं, लेकिन वह नहीं आता है। उनकी आस खत्म हो जाती है।

एक रोज पदम घर के बाहर दो चिता बनाता है और तुलसी से कहता है कि दोनों पहाड़ से नीचे कूदकर जान देते हैं। कम से कम गांव में बचे लोग उनका अंतिम संस्कार तो कर सकते हैं, लेकिन तुलसी उनकी बात को अनसुनी कर देती है। एक सुबह वह उठती है और देखती है कि पदम चिता पर लेटा है।

वह उसे उठाती है, लेकिन वह नहीं उठता। तुलसी तन्हा हो जाती है, टूट जाती है और अकेले अपने पति का अंतिम संस्कार कर देती है। ।

समाचार स्रोत: DARSH NEWS

पाठक प्रतिक्रियाएं

इस श्रेणी की अन्य ख़बरें

मनोरंजन • अखिल भारतीय

पाकिस्तानी ड्रामा ने भारत में मचाई धूम, आइडल पति बन छाए Abu Bakr, यूजर्स बोले- 'हमारे पास अजय देवगन है'

मनोरंजन • अखिल भारतीय

पिता को याद करके भावुक हुए Ramayana के 'हनुमान', धर्मेंद्र के फार्महाउस से Sunny Deol ने शेयर किया वीडियो

मनोरंजन • अखिल भारतीय

Ramayana से जुड़ी 5 खास बातें जो Ranbir Kapoor की फिल्म को बनाते हैं सबसे अलग! पहले कभी नहीं देखे होंगे ऐसे सीन्स

मनोरंजन • अखिल भारतीय

प्रेग्नेंट पत्नी धनाश्री को युजवेंद्र चहल ने किया था चीट? RJ महवश इस एक बयान से मचा बवाल

मनोरंजन • अखिल भारतीय

Bhojpuri Gana: भरे बाजार में खेसारी लाल यादव संग इस हसीना ने लगाए ठुमके, हो गई दीवानी

मनोरंजन • अखिल भारतीय

दीवाली पर Lata Mangeshkar ने गाया था सदाबहार मराठी गीत, 70 सालों से घरों में हर सुबह फेस्टिवल पर बजता है गाना

मनोरंजन • अखिल भारतीय

लता मंगेशकर का 54 साल पुराना गाना, फिल्म बनने में लगे 14 साल; आज भी बरकरार है वही जादू

मनोरंजन • अखिल भारतीय

Ramayana Public Review: हिट-फ्लॉप या। AI विजुअल के नाम पर रामायण की आत्मा से खिलवाड़?

होम
राजनीति
खेल
सिनेमा
वायरल