4 नवंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन बढ़त दर्ज की गई और बाजार का मूड पूरी तरह पॉजिटिव नजर आया। स्मॉलकैप शेयरों में करीब दो फीसदी का उछाल देखने को मिला, मिडकैप भी मजबूती के साथ बंद हुए, हालांकि आईटी सेक्टर थोड़ा पीछे रह गया। आज मीडिया, मेटल और रियल्टी शेयरों ने बाजार को रफ्तार देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
बाजार की इस तेजी के बीच एसआईपी (SIP) निवेशकों के सामने एक पुरानी उलझन फिर लौट आई है—क्या उन्हें कम लागत वाले लार्जकैप इंडेक्स फंड्स का रुख करना चाहिए या स्मॉलकैप फंड्स में ही अपनी एसआईपी जारी रखनी चाहिए? वैल्यूएशन के नजरिए से देखें तो स्मॉलकैप में अभी थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 का पी/ई (P/E) रेश्यो करीब 35 और प्राइस-टू-बुक (P/B) 3. 6 के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके मुकाबले निफ्टी 50 का पी/ई लगभग 19.
7 और P/B 2. 9 पर है। इसका मतलब है कि स्मॉलकैप में अर्निंग यील्ड करीब 2.
8 फीसदी है, जबकि लार्जकैप में यह लगभग 5. 1 फीसदी बैठती है। इतिहास भी गवाह है कि जब भी बाजार में कोई बड़ा संकट आता है, तो स्मॉलकैप में लार्जकैप की तुलना में ज्यादा भारी गिरावट होती है—जैसे मार्च 2020 की मंदी में देखने को मिला था।
इंडेक्सपी/ईपी/बीअर्निंग यील्डबड़ी गिरावटनिफ्टी 5019. 72. 9≈5.
1%मार्च 2020 में −38%निफ्टी स्मॉलकैप 10035. 33. 6≈2.
8%मार्च 2020 में −47%लार्जकैप इंडेक्स फंड बनाम स्मॉलकैप एसआईपी: एसेट एलोकेशन और अनुशासनबाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने का सबसे बेहतरीन तरीका किश्तों में निवेश करना है, खासकर स्मॉलकैप के मामले में। जो निवेशक पहले से स्मॉलकैप में एसआईपी कर रहे हैं, वे इसे जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें एक लिमिट तय करनी चाहिए और समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना चाहिए।
वहीं, नए पैसे का बड़ा हिस्सा लार्जकैप की तरफ तब तक लगाया जा सकता है जब तक स्मॉलकैप का वैल्यूएशन थोड़ा सामान्य न हो जाए। पोर्टफोलियो विभाजन का एक आसान नियम यह हो सकता है: सतर्क निवेशकों के लिए 80/20, संतुलित दृष्टिकोण के लिए 60/40, और आक्रामक निवेशकों के लिए 30/70 का अनुपात (लार्जकैप इंडेक्स और स्मॉलकैप फंड के बीच)।
अपने एलोकेशन को नियंत्रित रखने के लिए तय सीमा और नियमित कैलेंडेरिकल रीबैलेंसिंग का पालन करें। मौजूदा समय में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिल रहा रिटर्न इक्विटी के मुकाबले एक मजबूत विकल्प पेश कर रहा है। उदाहरण के लिए, एचडीएफसी बैंक 2 से 5 साल की एफडी पर 6.
55–6. 60 फीसदी और वरिष्ठ नागरिकों को 7. 05–7.
20 फीसदी का ब्याज दे रहा है। इसके मुकाबले, निफ्टी 50 की अर्निंग यील्ड करीब 5. 1 फीसदी और स्मॉलकैप की महज 2.
8 फीसदी के आसपास है। स्मॉलकैप के इस ऊंचे वैल्यूएशन को देखते हुए, एफडी से बेहतर और स्थायी रिटर्न देने के लिए कंपनियों को बहुत मजबूत अर्निंग्स ग्रोथ दिखानी होगी। निवेश का फैसला लेते समय फंड के खर्चों और टैक्स को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
डायरेक्ट लार्जकैप इंडेक्स फंड्स का टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) आमतौर पर केवल 0. 10–0. 25 फीसदी होता है; उदाहरण के लिए बड़ौदा बीएनपी के निफ्टी 50 डायरेक्ट प्लान का TER 0.
16 फीसदी है। दूसरी तरफ, स्मॉलकैप डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो अक्सर 0. 4 से 1.
0 फीसदी के दायरा में रहता है, जैसे 0. 44 फीसदी और 0. 95 फीसदी।
ज्यादातर इक्विटी फंड्स 12 महीने के अंदर रिडेम्पशन पर 1 फीसदी का एग्जिट लोड लगाते हैं। टैक्स के लिहाज से, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस (STCG) पर 20 फीसदी टैक्स लगता है, जबकि ₹1. 25 लाख से अधिक के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) पर 12.
5 फीसदी टैक्स देय है। अपने तय एसेट एलोकेशन से भटकाव होने पर या फिर हर छह महीने में अपने पोर्टफोलियो की रीबैलेंसिंग जरूर करें। ।
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