फ्लाइट में बिगड़ी तबीयत और बजी वॉच की घंटी। टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। जब Apple ने 2015 में पहली जनरेशन की Apple Watch पेश की थी, तो जैसे iPhone ने मोबाइल फोन्स की दुनिया बदली थी, इसने भी इंडस्ट्री में क्रांति ला दी।
खास तौर पर से अपनी एडवांस्ड हेल्थ और फिटनेस ट्रैकिंग कैपेबिलिटीज और पोटेंशियल लाइफ-सेविंग फीचर्स के दम पर, Apple कुछ ही सालों में ट्रेडिशनल स्विस ब्रांड्स को पीछे छोड़कर ग्लोबली नंबर-1 वॉच ब्रांड बन गया। कोई भी दूसरा ब्रांडेड वॉच सैकड़ों इंसानी जिंदगियां बचाने में कामयाब नहीं रहा है।
ताजा मामले में, Apple Watch ने पटियाला के एक सीनियर डॉक्टर की जान बचाई है। डॉ. सतीश सचदेवा अपनी बेटी प्रांजलि से मिलने के लिए बेंगलुरु की फ्लाइट में थे।
फ्लाइट के दौरान, उन्हें बेचैनी और सीने में फ्लटरिंग महसूस हुई और थोड़ी ही देर में उनकी Apple Watch ने उन्हें हार्टबीट में इर्रेग्युलैरिटी को लेकर अलर्ट कर दिया। इस दिक्कत को रीकन्फर्म करने के लिए 69 वर्षीय डॉक्टर ने तुरंत अपनी Apple Watch Series 7 पर ECG फीचर ऑन किया।
उन्हें ये देखकर झटका लगा कि वॉच में एक्टोपिक हार्टबीट दिखाई दे रही थी। जिन्हें नहीं पता, उनके लिए बता दें कि एक्टोपिक हार्टबीट एक एक्स्ट्रा या स्किप्ड हार्टबीट होती है, जो तब होती है जब दिल अपने नॉर्मल रिदम से बाहर जाकर सिकुड़ता है। जल्द ही उन्होंने बेंगलुरु में एक कार्डियोलॉजिस्ट से कंसल्ट किया, जिन्होंने उस रीडिंग को गंभीरता से लिया और पाया कि उनके माइट्रल वॉल्व को रिप्लेस करने की जरूरत थी।
एक सीनियर मेडिकल प्रोफेशनल होने के बावजूद जो रूटीन हेल्थ चेकअप कराते रहते थे, उनकी ये कंडीशन तब तक पूरी तरह से अनडिटेक्टेड रही जब तक कि Apple Watch ने इसे फ्लैग नहीं किया। वह साल में दो बार इकोकार्डियोग्राम करवाते थे। अगर वह सिर्फ अपने रूटीन चेकअप का इंतजार करते, तो उनके वॉल्व का कैल्सीफिकेशन खतरनाक रूप से बढ़ जाता।
इसके बजाय, वॉच ने एक अहम अर्ली वॉर्निंग दी, जिससे तुरंत मेडिकल इवैल्यूएशन और टाइम पर सर्जरी मुमकिन हो सकी। उनका इलाज मेदांता में हुआ, जहां उन्हें एक नया माइट्रल वॉल्व लगाया गया। वह काफी तेजी से रिकवर हुए हैं, फुल-टाइम काम पर वापस लौट आए हैं और एक नॉर्मल, एक्टिव लाइफ जी रहे हैं।
Apple Watch की क्षमताओं से इम्प्रेस होकर डॉ. सचदेवा की बेटी प्रांजलि ने Apple Inc. के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन टिम कुक को एक थैंक-यू नोट लिखा।
प्रांजलि ने टिम कुक को लिखे लेटर में कहा, 'ये जर्नी हमारे परिवार के लिए काफी मुश्किल थी। लेकिन मैं अच्छी तरह जानती हूं कि अगर ये वॉच नहीं होती तो उनकी कंडीशन कभी डिटेक्ट नहीं हो पाती और इसीलिए मैं ये नोट लिख रही हूं। उनके जैसे मामलों में, जब तक प्रॉब्लम जल्दी न पकड़ी जाए, आमतौर पर इमरजेंसी आने के बाद मरीज को बचाना बहुत देर हो चुका होता है।
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