PoK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा बढ़ गई है। रावलकोट में गुरुवार (5 नवंबर) को प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की फायरिंग में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया है कि सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर भारी मशीनगनों और ड्रोन से हमला किया। पार्टी के मुताबिक, कार्रवाई रावलकोट के मटियालमेरा बस टर्मिनल, उमर फारूक चौक और अन्य स्थानों पर चल रहे धरनों के दौरान हुई।
आरोप है कि सुरक्षाबलों ने गोलीबारी के साथ बख्तरबंद गाड़ियों का भी इस्तेमाल किया। हालांकि, घटना को लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। PoK में 7 जून से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब व्यापक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की मांगें राजनीतिक अधिकारों और आर्थिक समस्याओं से शुरू होकर सुरक्षाबलों की वापसी और नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने तक पहुंच गई हैं। आइए, समझते हैं कि रावलकोट में क्या हुआ और PoK में विरोध प्रदर्शन क्यों बढ़ रहा है। UKPNP , रावलकोट में अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन और धरने चल रहे थे।
इसी दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। पार्टी ने आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने भारी मशीनगनों से गोलीबारी की और ड्रोन का इस्तेमाल कर हमले किए। इस घटना में कम से कम 7 लोगों की मौत और 18 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी दी गई है।
मृतकों में बच्चों के शामिल होने की बात भी सामने आई है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में यह आंदोलन स्थानीय लोगों की राजनीतिक और आर्थिक मांगों को लेकर शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों की शिकायतों में राजनीतिक अधिकारों से जुड़े सवाल और आर्थिक परेशानियां शामिल हैं।
समय के साथ आंदोलन का दायरा बढ़ा है। अब प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों की वापसी और अपने नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ने के साथ स्थिति गंभीर होती जा रही है।
रावलकोट में हुई कथित गोलीबारी ने आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, गुरुवार की घटना में 7 लोगों की मौत के बाद आंदोलन से जुड़ी हिंसा में जान गंवाने वालों की कुल संख्या 153 बताई जा रही है।
इस तरह आंदोलन अब केवल राजनीतिक और आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रह गया है। हिंसा और मौतों की खबरों के बीच सुरक्षाबलों की भूमिका, प्रदर्शनकारियों की मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर भी ध्यान केंद्रित हो गया है। ।
पाठक प्रतिक्रियाएं