प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से आगामी एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील किए जाने के बाद सर्राफा व्यापारियों और व्यापारिक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने प्रधानमंत्री की इस अपील को सर्राफा बाजार के लिए “डेथ वारंट” करार देते हुए कहा कि यह बयान पहले से आर्थिक मंदी, महंगाई और घटती खरीदारी से जूझ रहे सर्राफा कारोबार के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने कहा कि भारतीय समाज में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि वर्षों से सुरक्षित निवेश, पारिवारिक परंपरा और संकट के समय सहारा माना जाता है। ऐसे में देश के सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा जनता से सोना न खरीदने की अपील करना बाजार में नकारात्मक संदेश देने वाला कदम है, जिससे व्यापारियों के साथ-साथ लाखों कारीगरों और श्रमिक परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सर्राफा बाजार केवल बड़े-बड़े शोरूमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस उद्योग की असली ताकत छोटे व्यापारी, सुनार, डिजाइनर, पॉलिश मजदूर, पैकिंग कर्मी, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी तथा दैनिक मजदूरी पर कार्य करने वाले लाखों कारीगर हैं। यदि सोने की खरीदारी में भारी गिरावट आती है तो छोटे व्यापारियों की दुकानदारी ठप हो जाएगी और हजारों कारीगर बेरोजगारी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
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जुनेजा ने कहा कि सर्राफा कारोबार से जुड़े सहायक उद्योग जैसे पॉलिशिंग, डिब्बा निर्माण, पैकिंग, कूरियर सेवाएं और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय भी गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। व्यापारियों द्वारा पहले से खरीदे गए भारी स्टॉक पर लगने वाला ब्याज और लागत उन्हें आर्थिक संकट एवं दिवालियापन की स्थिति तक पहुंचा सकती है। वहीं छोटे कारीगरों की आय रुकने से उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो जाएगा और कई लोगों को पलायन या दूसरा रोजगार तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने केंद्र सरकार से मांग की कि व्यापारियों और कारीगरों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे बयानों और नीतियों पर पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में छोटे व्यापारी और कारीगर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे बाजार में विश्वास और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ें, न कि पूरा उद्योग ही संकट में पड़ जाए।
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