मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 30 प्रतिशत रोजगार वृद्धि जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में । वर्ष 2020 में पहली बार मोबाइल फोन के निर्माण के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम लाई गई। फिर मैन्यूफैक्चरिंग के प्रोत्साहन के लिए 14 विभिन्न सेक्टर में पीएलआई स्कीम की घोषणा की गई और उसका असर रोजगार भी दिखा है।
वित्त मंत्रालय के आंकडों के मुताबिक वर्ष 2021 से लेकर 2025 के बीच संगठित मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के रोजगार में 30 प्रतिशत का इजाफा रहा। वर्ष 2021 में संगठित मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 1. 6 करोड़ लोग काम कर रहे थे जिनकी संख्या 2025 में बढ़कर 2.
1 करोड़ हो गई। आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में श्रमिकों की उत्पादकता में भी 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि उनका वेतन 29 प्रतिशत बढ़ा। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 से लेकर 2025 के बीच संगठित रोजगार बढ़ाने में मुख्य रूप से पांच राज्य और सात औद्योगिक सेक्टर की भूमिका निभाई।
पांच राज्यों में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश व हरियाणा शामिल हैं। इन पांच राज्यों में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के 56 प्रतिशत रोजगार निकले। इनमें तमिलनाडु की सबसे अधिक 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
इसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र की 13-13 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश की नौ तो हरियाणा की हिस्सेदारी छह प्रतिशत है। इलेक्ट्रानिक्स से जुड़ी सबसे अधिक मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट तमिलनाडु में लगाई गई है। उत्तर प्रदेश का नोएडा भी मोबाइल फोन निर्माण के हब के रूप में उभरा जहां सैमसंग से लेकर वीवो जैसे कई बड़े ब्रांड निर्माण कार्य कर रही हैं।
तभी वर्ष 2021 से लेकर 2025 के बीच सिर्फ उत्तर प्रदेश में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के रोजगार में 60 प्रतिशत का इजाफा हुआ। रोजगार का 52 प्रतिशत सृजन मुख्य रूप से सात सेक्टर में हो रहा हैं। इनमें फूड प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, बेसिक मेटल, वियरिंग अपैरल, केमिकल्स व केमिकल्स उत्पाद, मशीनरी व विभिन्न उपकरण एवं मोटर वाहन व संबंध आइटम शामिल हैं।
फूड प्रोडक्ट्स के निर्माण में 11 प्रतिशत, टेक्सटाइल में आठ प्रतिशत, बेसिक मेटल्स में आठ प्रतिशत, वियरिंग अपैरल में सात प्रतिशत मोटर वाहन व संबंधित में सात प्रतिशत, केमिकल्स व केमिकल उत्पाद में पांच प्रतिशत तो मशीनरी व उपकरण में छह प्रतिशत रोजगार का सृजन हो रहा है।
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक मैन्यूफैक्चरिंग में मिलने वाले रोजगार में तीन चौथाई हिस्सेदारी गैर सरकारी कंपनियों की है। पार्टनरशिप और प्रोप्राइटरशिप फर्म ने 21 प्रतिशत रोजगार दिया हुआ है। सरकार के स्वामित्व वाली या कोपरेटिव संस्थाओं की हिस्सेदारी मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़े रोजगार में काफी कम है।
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