चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसकी आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना की रिपोर्टिंग अथॉरिटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। चुनाव आयोग ने सीमा खन्ना की रिपोर्टिंग अथॉरिटी पर दिया स्पष्टीकरण। आईटी महानिदेशक की रिपोर्टिंग अथॉरिटी में कोई बदलाव नहीं हुआ।
नए कार्य आवंटन आदेश के बाद ECI ने स्थिति साफ की। डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना की रिपोर्टिंग अथॉरिटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यह स्पष्टीकरण आयोग की तरफ से एक नया कार्य आवंटन जारी करने के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसके तहत सीमा खन्ना को सीनियर डिप्टी ईसी मनीष गर्ग की बजाय डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर प्रकाश राज पुरोहित के चार्ज में रखा गया है। बता दें कि यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब 28 जुलाई को डिप्टी ईसी मनीष गर्ग ने एक आदेश जारी कर सीमा खन्ना को सीधे चुनाव आयोग, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी व एसएस संधू शामिल हैं, को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया था।
इससे पहले सीमा खन्ना डिप्टी ईसी संजय कुमार को रिपोर्ट करती थीं। जब संजय कुमार का ट्रांसफर दिल्ली सरकार में हो गया, तब मनीष गर्ग ने यह आदेश जारी किया था, जिससे बीच की एक कड़ी खत्म हो गई और खन्ना सीधे आयोग के संपर्क में आ गईं। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों संधू और जोशी ने इस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई थी और कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथेन को अलग-अलग पत्र लिखकर जिम्मेदारियों के बंटवारे पर चिंता व्यक्त की थी।
इसके बाद इस आदेश को रोक दिया गया था। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को भी बताया था कि 28 जुलाई का वह आदेश कभी लागू ही नहीं हुआ था। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चूंकि वह आदेश लागू नहीं हुआ था, इसलिए संजय कुमार के जाने के बाद मनीष गर्ग ही सीमा खन्ना की देखरेख कर रहे थे।
अब हाल ही में नए डिप्टी ईसी के रूप में शामिल हुए राज पुरोहित को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि सीमा खन्ना के नेतृत्व वाले आईटी डिवीजन के पास मतदाता सूची सॉफ्टवेयर के नियंत्रण अधिकार हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट , चुनाव आयुक्तों को चिंता थी कि जो अधिकारी कानूनी रूप से मतदाता सूची तैयार करने के लिए जिम्मेदार होते हैं (यानी ईआरओ) वे सॉफ्टवेयर की पाबंदियों के कारण अपने काम ठीक से नहीं कर पा रहे थे।
ध्यान देने वाली बात यह है कि मामले में आरोप था कि आईटी डिवीजन द्वारा इन अधिकारों का अत्यधिक केंद्रीकरण किया जा रहा है, जिससे मैदानी स्तर के अधिकारियों के अधिकार सीमित हो रहे हैं। ।
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