Chambal Dacoit Kalli Gurjar Encounter: चंबल के बीहड़ों में सक्रिय डकैत कल्ली किलेदार सिंह गुर्जर को मध्य प्रदेश के मुरैना में पुलिस ने 5 नवंबर 2026 को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। बानमोर थाना क्षेत्र के ललितापुरा के पहाड़ी जंगलों में हुई इस मुठभेड़ में कल्ली और उसका साथी अजय गुर्जर घायल हो गए।
पुलिस के मुताबिक, दोनों के पैरों में गोली लगी है। कल्ली पर 80 हजार रुपये का इनाम घोषित था और उसकी तलाश में करीब 200 पुलिसकर्मी जुटे थे। कल्ली गुर्जर पर हत्या के प्रयास, मारपीट, रंगदारी और अवैध हथियार रखने समेत कई गंभीर आरोप हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुरैना, ग्वालियर और श्योपुर में उसके खिलाफ करीब 20 मामले दर्ज हैं। लेकिन उसकी कहानी सिर्फ अपराध और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, कभी वह पुलिस के लिए मुखबिरी करता था।
फिर पशु चोरी जैसे मामलों से उसका नाम जुड़ा और धीरे-धीरे वह हथियारबंद गिरोह का हिस्सा बन गया। साल 2022 में नाबालिग लड़की से शादी की जिद में एक परिवार पर हमले के आरोप से लेकर 2026 में हाईवे पर कंटेनर चालक से कथित रंगदारी और सोशल मीडिया पर विरोधी को चुनौती देने तक, कल्ली का नाम लगातार सुर्खियों में रहा।
सितंबर 2024 में गिरफ्तारी और दिसंबर में जमानत मिलने के बाद वह दोबारा पुलिस की तलाश में कैसे आया? आइए, समझते हैं कल्ली गुर्जर की पूरी कहानी। कल्ली गुर्जर का पूरा नाम कल्ली किलेदार सिंह गुर्जर है।
वह मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के चाचुल गांव का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 36 साल बताई जाती है। मुरैना और आसपास के इलाकों में दर्ज आपराधिक मामलों के चलते उसका नाम पुलिस रिकॉर्ड में आया।
बाद में ग्वालियर और श्योपुर के कुछ मामलों में भी उसकी तलाश की गई। कल्ली का नाम ऐसे समय में चर्चा में आया, जब चंबल क्षेत्र में पुराने कुख्यात डकैत गिरोहों का प्रभाव काफी कम हो चुका था। पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, मारपीट और हथियारों से जुड़े कई मामले दर्ज हैं।
5 नवंबर 2026 को गिरफ्तारी से पहले उस पर 80 हजार रुपये का इनाम था। पुलिस रिकॉर्ड , मुरैना के सरायछोला थाने में उसके खिलाफ सबसे ज्यादा 6 मामले दर्ज हैं। देवगढ़ थाने में तीन मामले हैं।
इसके अलावा बागचीनी, टिमनी, नूराबाद, जौरा, कोतवाली और सिविल लाइन थानों में भी उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज हैं। ग्वालियर के तिघरा, घाटीगांव, हस्तिनापुर और भंवरपुरा तथा श्योपुर के बरगवां थाने में भी मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। कल्ली गुर्जर की कहानी का एक अहम पहलू यह है कि रिपोर्टों के मुताबिक, वह कभी पुलिस के लिए मुखबिरी करता था।
बताया जाता है कि उसने डकैतों के बारे में पुलिस को सूचनाएं दी थीं और कुछ अपराधियों की गिरफ्तारी में मदद की थी। मुखबिर के तौर पर उसकी भूमिका के कारण उसे हथियार का लाइसेंस मिलने की बात भी सामने आई है। इसी लाइसेंस पर उसने .
315 बोर की राइफल खरीदी थी। चंबल क्षेत्र में इस तरह की राइफल को आम बोलचाल में 'पंचफेरा' (पांच गोली) भी कहा जाता है। ।
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